Draw well on the ground the Rasi Chakra and post in the same in their proper places the several planets as they stood at the time of birth. Regulate the distribution of the beads in the manner directed (in the following Slokas), in the several Rasis, the reckoning in each case being made from the sign occupied by the particular planet for getting the Ashtakavarga.
पहले भूमि पर राशि-चक्र आदि बनाने की प्रथा थी और जहाँ बिन्दी लगानी होती वहाँ रुद्राक्ष का दाना या अन्य कोई गोली के आकार का फल रखकर गणना किया करते थे। किन्तु अब हम लोग सब कार्य कागज पर करते हैं और जहाँ गोली का निशान बनाना हो वहाँ ० (शून्य) का चिह्न लगा देते हैं। इसलिये श्लोकों में यद्यपि 'अक्ष' (गोली) रखना आदि लिखा है, तथापि हम अपनी व्याख्या में विषय को आधुनिक तरीके से समझाएँगे। कागज पर जन्म-कुण्डली बना लीजिये, जन्म-लग्न तथा जन्म-कुण्डली में जो ग्रह जहाँ हो ध्यानपूर्वक लिखें। नीचे के श्लोकों में सात ग्रहों के सात चक्र और एक सातों की सम्मिलित संख्या का चक्र — इस प्रकार कुल आठ चक्र बनाने बताये गये हैं। यहाँ राहु और केतु की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि ये केवल गणित-सिद्ध स्थान मात्र हैं — इनका शरीर-पिण्ड नहीं है।
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