When the Sun transits (1) the Rasi that represents his own Dwadasamsa (2) the Navamsa Rasi occupied by the lord of the 8th house, or (3) the Navamsa Rasi occupied by the lord of the Lagna or their Trikona positions, death may be expected.
यह देखिये कि निम्नलिखित कहाँ है — (१) सूर्य द्वादशांश-राशि, (२) अष्टमेश जिस नवांश में हो, (३) लग्नेश जिस नवांश में हो। बृहस्पति या सूर्य गोचरवश जब उपर्युक्त स्थान या उनसे नवम-पंचम आते हैं, तब जातक की मृत्यु होती है। इन श्लोकों में जो शनि, गुरु और सूर्य के गोचरवश मृत्युकाल बताया है, उसका आशय यह नहीं है कि उस समय मृत्यु हो ही जायगी — क्योंकि शनि तीस वर्ष में, बृहस्पति १२ वर्ष में, और सूर्य एक वर्ष में पूरा परिभ्रमण कर ही लेता है। इन गोचरों को बताने का उद्देश्य यही है कि मारक ग्रह की दशा-अन्तर्दशा हो और उसमें यह निर्णय करना हो कि किस वर्ष, किस मास में मृत्यु होगी, तब ऊपर लिखे प्रकार से देखना चाहिये।
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