HomeLibraryPhaladeepikaCh.26Verse 11
Phaladeepika
Chapter 26 · gocaraphala · गोचरफल · Verse 11
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
आपद्दैन्यं तपसि विरहं चित्तचेष्टानिरोधं
प्राप्तोन्युग्रां दशमगृहगे कर्मसिद्धिं दिनेशे ।
स्थानं मानं विभवमपि चैकादशे रोगनाशं
क्लेशं वित्तक्षयमपि सुहृद्वैरमन्त्ये ज्वरं च
IAST Transliteration
āpaddainyaṃ tapasi virahaṃ cittaceṣṭānirodhaṃ prāptonyugrāṃ daśamagṛhage karmasiddhiṃ dineśe | sthānaṃ mānaṃ vibhavamapi caikādaśe roganāśaṃ kleśaṃ vittakṣayamapi suhṛdvairamantye jvaraṃ ca
TranslationsTwo-source verified
English

The Sun's transit in the 9th house will cause to the native danger, humiliation, separation from his kith and kin and mental depression. During the Sun's passage through the 10th house a very mighty undertaking will be successfully completed. A new position, honour, wealth and freedom from diseases will be the effect of the Sun's transit in the 11th house. When the Sun passes through the 12th house, there will be sorrow, loss of wealth, quarrel with one's friends and fever.

Hindi

अब सूर्य जन्म-राशि से गिनने पर — गोचरवश प्रत्येक स्थान में क्या-क्या फल उत्पन्न करता है — यह बताते हैं। उदाहरण के लिये जन्म-कुण्डली में वृष राशि में चन्द्रमा है तो सूर्य जब वृष राशि में होगा तो प्रथम स्थान में हुआ; मिथुन में जब सूर्य हुआ तो द्वितीय सूर्य हुआ — इस प्रकार प्रथम, द्वितीय आदि गिनना चाहिये। (१) परिश्रम कराता है, धन खर्च होता है, जातक क्रोध करता है (मन के प्रतिकूल परिस्थिति होने से क्रोध होता है), यात्रा कराता है या यात्रा नहीं हुई तो जिस स्थान में मनुष्य रहता है वहीं बहुत चलाता है। (२) धन का नाश, सुख नहीं होता, मनुष्य ज़िद्दी हो जाता है, लोग उसको धोखा देकर उससे काम निकालते हैं। (३) स्थान-प्राप्ति, धन-संग्रह से हर्ष, शुभ समाचार प्राप्त हों या शुभ कार्य करे, शत्रुओं का नाश हो — उन पर विजय प्राप्त हो। (४) रोग उत्पन्न हो, सुख के कार्यों में बाधा हो। (५) मन में क्षोभ हो, रोग-मोह आदि के कारण मानसिक विकलता। (६) रोगों का नाश हो, शत्रुओं पर विजय हो, शोक-मोह आदि विकलता उत्पन्न करने वाले भावों का नाश हो — अर्थात् चित्त स्वस्थ रहे। (७) रास्ता चलना पड़े, पेट में या गुदा में (बवासीर आदि) पीड़ा हो, मनुष्य को दीनता-हीनता अर्थात् सम्मान-हानि, आदर की कमी के कारण मन में क्लेश का अनुभव हो। (८) रोग, भय उत्पन्न करे, मन में ताप (चिन्ता), कलह (लड़ाई, झगड़ा, विवाद), राजा या सरकार-अधिकारी वर्ग से भय — उनकी नाराज़गी का अन्देशा हो। (९) आपत्ति, दीनता, अपने प्रिय लोगों से विरह, जो उद्योग किये जावें उनमें असफलता। (१०) जिस कार्य की सिद्धि के लिये काम कर रहे हों उसमें सफलता — कोई बड़ा कार्य उठाया गया हो तो वह पूरा हो। (११) स्थान-प्राप्ति, सम्मान-वृद्धि, द्रव्य-लाभ, रोग से छुटकारा, आर्थिक-शारीरिक स्वास्थ्य। (१२) क्लेश, धन की बर्बादी, ज्वर आदि रोग, दोस्त दुश्मनी करे।

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