HomeLibraryPhaladeepikaCh.19Verse 3
Phaladeepika
Chapter 19 · daśāphala · दशाफल · Verse 3
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
तृक्षस्य गम्या घटिका दशाब्द\-
निघ्ना नताप्ता स्वदशाब्दसंख्या ।
रूपैर्नगैः संगुणयेन्नतेन
हृतास्तु मासा दिवसाः क्रमेण
IAST Transliteration
tṛkṣasya gamyā ghaṭikā daśābda\- nighnā natāptā svadaśābdasaṃkhyā | rūpairnagaiḥ saṃguṇayennatena hṛtāstu māsā divasāḥ krameṇa
TranslationsTwo-source verified
English

At the time of birth, find out the number of Ghatikas, etc., still to be traversed (by the Moon) in the star he is in. Multiply this by the number of years allotted to the ruler of the star and divide the product by 60. The quotient will be the period in years still to elapse. Any remainder remaining may be converted into months by multiplying by 12 and dividing by 60 and the remainder again into days by multiplying by 30 and dividing by 60 and so on.

Hindi

जन्म के समय किसी ग्रह की कितनी दशा भोग्य थी यह निकालने का प्रकार बताते हैं। यह देखिये कि जन्म के समय चन्द्रमा किस नक्षत्र में है और जन्म के बाद कितनी घड़ी तक उस नक्षत्र में और रहेगा। जितनी घड़ी तक और रहेगा उन घड़ियों को महादशा के मान से गुणा कीजिये और ६० से भाग देकर यह निकाल लीजिये कि भोग्य वर्ष कितने आये। मान लीजिये जन्म के समय पुनर्वसु नक्षत्र के बीस घड़ी शेष थे। श्लोक २ में बताया गया है कि पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म होने से बृहस्पति की महादशा में जन्म होता है, इस कारण बृहस्पति की दशा में जन्म हुआ। बृहस्पति की दशा कितनी शेष है? १६ × २० / ६० = ३२० / ६० = ५ वर्ष ४ महीने। मन्त्रेश्वर महाराज के कथन में और अन्य ज्योतिष ग्रन्थों में यह अन्तर है कि मन्त्रेश्वर महाराज के कथनानुसार सदैव ६० से भाग देना चाहिये किन्तु अन्य ग्रंथों के अनुसार नक्षत्र का जितना पूरा मान हो उससे भाग देना चाहिये (देखिये 'सुगम ज्योतिष प्रवेशिका' दसवाँ प्रकरण)। प्रचलित पद्धति में नक्षत्र के बीते हुए और बाकी पल जोड़कर कुल मान (क) निकालते हैं और शेष भाग (ख) को उससे गुणाकर भोग्य दशा निकालते हैं; मन्त्रेश्वर के मत में 'क' सदैव ६० घड़ी मानते हैं और केवल 'ख' पर गणित कर भोग्य दशा निकालते हैं।

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