At the time when Saturn's Dasa is in progress, the native will acquire wealth on account of some trouble in the country and fighting; he will get servants and old women; will have acquisition of cows, buffaloes and bulls; and trouble to children and wife. He will suffer from windy and phlegmatic diseases, and piles, and a burning sensation in the legs, hands and other limbs.
इस श्लोक में शनि की महादशा का फल बताया गया है। जब शनि की महादशा हो तो देश में कोई पीड़ा हो रही हो या देश पर कोई प्रहार हो रहा हो या लड़ाई हो रही हो — उसके फलस्वरूप धन-प्राप्ति होती है। जैसे लड़ाई के दिनों में चोर-बाज़ार में कमाई होती है या दुर्भिक्ष के समय कुछ लोग अधिक पैसा कमा लेते हैं — इस प्रकार की कमाई को शनि की महादशा का फल समझें। शनि की महादशा में नौकरों की प्राप्ति हो। वृद्ध स्त्री (अर्थात् जिसकी जवानी बीत चुकी है) की प्राप्ति भी हो। शनि की महादशा तो लाखों व्यक्तियों को हो जाती है किन्तु वृद्ध स्त्री की प्राप्ति तो सबको नहीं होती। यहाँ पर 'वृद्ध' का अर्थ अधिक अवस्था वाली लेना चाहिये, और जन्मकुण्डली में यदि शनि ऐसा योग करता है जिसके कारण अन्य स्त्री से संसर्ग होने की सम्भावना हो तभी शनि की दशा में यह योग घटित हो। शनि की महादशा में पशु, भैंस और बैल की प्राप्ति भी होती है, किन्तु जातक की स्त्री और पुत्र को पीड़ा होती है और जातक स्वयं को वातरोग (गठिया, बाय आदि), कफ रोग, गुदा रोग (बवासीर आदि) होते हैं तथा हाथ-पैरों में जलन रहती है।
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