HomeLibraryPhaladeepikaCh.6Verse 43
Phaladeepika
Chapter 6 · yogādhyāya · योगाध्याय · Verse 43
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
अधियोगभवो नरेश्वंरः स्थिरसम्पद्बहुबन्धुपोषकः ।
अमुना रिपवः पराजिताह्चिरमायुर्लभते प्रसिद्धताम्
IAST Transliteration
adhiyogabhavo nareśvaṃraḥ sthirasampadbahubandhupoṣakaḥ | amunā ripavaḥ parājitāhciramāyurlabhate prasiddhatām
TranslationsTwo-source verified
English

The person born in the Adhiyoga will become the lord of men, will be wealthy throughout life (have everlasting wealth), will feed many of his relations, will overthrow his enemies, enjoy long life and become widely renowned.

Hindi

(१) यदि चन्द्रमा से छठे, सातवें, आठवें — शुभ ग्रह हों तो अधियोग होता है। (२) यदि लग्न से छठे, सातवें, आठवें — शुभ ग्रह हों तो भी अधियोग होता है। यदि ये तीनों पूर्ण बली हों अर्थात् बुध, बृहस्पति, शुक्र तीनों पूर्ण बली हों तो अधियोग में उत्पन्न मनुष्य भूपति होता है; यदि तीनों मध्यबली हों तो जातक मन्त्री होता है; यदि बुध, बृहस्पति, शुक्र हीनबली हों तो मनुष्य नेता होता है — किन्तु शुभ प्रभाव तब भी रहता है। अधियोग में उत्पन्न मनुष्य लक्ष्मीवान्, दीर्घायु और मनस्वी होते हैं। अधियोग में उत्पन्न होने वाले मनुष्य स्थिर सम्पत्ति वाले, बहुत-से बन्धुओं का पोषण करने में तत्पर और अनेक व्यक्तियों पर हुकूमत करने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति शत्रुओं को पराजित करने में सफल होते हैं और प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं। [बहुत से लोगों के विचार से चन्द्रमा से छठे, सातवें, आठवें — तीनों घरों में बुध, गुरु, शुक्र हों — अर्थात् ६, ७, ८ इन तीनों में कोई घर खाली न हो तभी अधियोग होता है, किन्तु ऐसा नहीं है क्योंकि श्रुतकीर्ति का वाक्य है कि व्यास तथा अन्य प्राचीन ज्योतिषियों के अनुसार चाहे ६, ७, ८ इन तीनों घरों में कोई खाली भी हो — यदि बुध, बृहस्पति, शुक्र एक साथ या अलग-अलग, या दो एक साथ-एक अलग, किसी भी प्रकार से स्थित हों तो अधियोग होता है।]

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