The person who has his birth in a Raja Yoga will be a King who (when he set out) will be accompanied by elephants, horses, litters, palanquins and the like, the roaring of kettle drums and the sounds of the conch shell, with a circular umbrella made of soft woven cloth held over him, praised by bards and minstrels and solicited by eminent men with various kinds of presents in their hands. The person born in Sankha Yoga will enjoy all comforts in the company of many beautiful damsels.
(१) यदि नवम और दशम भवन के स्वामी दोनों संयुक्त होकर किसी शुभ भाव में एक साथ बैठें तो राजयोग होता है। (२) यदि किसी केन्द्र का स्वामी किसी त्रिकोण के स्वामी के साथ संयुक्त होकर किसी शुभ भाव में बैठे तो शंख योग होता है। जो व्यक्ति राजयोग में उत्पन्न होता है वह राजा या राजा के समान पदवी वाला होता है। जब वह यात्रा करता है तो भेरी, शंख, ढोल आदि बाजे साथ में बजते हुए चलते हैं; उसके सिर पर छत्र रहता है। उसके साथ-साथ हाथी, घोड़े, पालकी आदि बहुत-सी सवारी चलती हैं। भाट और चारण उसकी स्तुति या प्रशंसा गाते रहते हैं और बहुत से बड़े-बड़े आदमी नाना रूप के सुन्दर उपहार हाथों में लिये भेंट करने के लिये प्रस्तुत रहते हैं। बहुत-सी श्रेष्ठ वनिताओं का भोग और सम्पत्ति प्राप्त होती है। [ओझा की पाद-टिप्पणी — जिस समय आज से सैकड़ों वर्ष पहले मन्त्रेश्वर महाराज ने फलदीपिका का निर्माण किया उस समय भारतवर्ष में हज़ारों राजा थे। ऐसे-ऐसे व्यक्ति राजा थे जिनकी आय ३०-४०-५० हज़ार से अधिक नहीं थी, इसलिये जहाँ-जहाँ राजा शब्द आवे उसका शब्दार्थ न लेकर भावार्थ — उच्च पदाधिकारी, धन-वैभव-सम्पन्न पुरुष — यह अर्थ लेना चाहिये।]
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