HomeLibraryPhaladeepikaCh.6Verse 22
Phaladeepika
Chapter 6 · yogādhyāya · योगाध्याय · Verse 22
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
जनाधिकारी क्षितिपालशस्तो भोगी प्रदाता परकार्यकर्ता ।
बन्धुप्रियः सत्सुतदारयुक्तोंधिरः सुमालाह्वययोगजातः
IAST Transliteration
janādhikārī kṣitipālaśasto bhogī pradātā parakāryakartā | bandhupriyaḥ satsutadārayuktoṃdhiraḥ sumālāhvayayogajātaḥ
TranslationsTwo-source verified
English

The person born in a Sumala Yoga will be a governor (or director), will be extolled by Kings and will be devoted to enjoyment. He will be liberal in gifts, helpful to others in getting their work done, and will love his relations. He will be blessed with a good wife and sons and will be courageous.

Hindi

इन श्लोकों में चार योग बताये हैं — शुभ माला, अशुभ माला, लक्ष्मी और गौरी। इन चारों योगों को क्रमशः बताते हैं। (१) यदि सब ग्रह पंक्ति से पाँचवें, छठे, सातवें घरों में हों तो शुभ माला योग होता है। (२) यदि समस्त ग्रह छठे, आठवें, बारहवें इन स्थानों में क्रम से हों तो अशुभ माला योग होता है। (३) यदि नवें स्थान का स्वामी और शुक्र दोनों अपने घर में या उच्चराशि में स्थित होकर लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हों तो लक्ष्मी योग होता है। (४) यदि चन्द्रमा स्वराशि या उच्चराशि का होकर लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हो और बृहस्पति उसे देखता हो तो गौरी योग होता है। जो व्यक्ति सुमाला या शुभमाला योग में उत्पन्न होता है वह अनेक व्यक्तियों पर अधिकार रखने वाला, भोगी, दाता, बन्धुप्रिय, उत्तम स्त्री-पुत्रों से युक्त और धीर हो; और राजा द्वारा प्रशंसित या सम्मानित हो। ऐसा व्यक्ति 'परकार्यकर्ता' हो। 'परकार्यकर्ता' शब्द के दो अर्थ हैं — दूसरे का कार्य करने वाला अर्थात् नौकरीपेशा हो। इस शब्द का दूसरा अर्थ हो सकता है — दूसरे का उपकार करने वाला। जो अशुभ मालिका योग में उत्पन्न होते हैं वे दूसरों का वध करने वाले, कृतघ्न, कलहप्रिय (झगड़ालू) और कुमार्गगामी होते हैं। ऐसे लोग कायर होते हैं और लोग उनकी निन्दा करते हैं। ऐसे व्यक्ति ब्राह्मणों का (या बड़ों का) सम्मान नहीं करते और दुःख उठाते हैं। जो लक्ष्मी योग में उत्पन्न होता है वह अच्छे स्वभाव वाली स्त्री के साथ नित्य क्रीड़ा करता है। ऐसा व्यक्ति तेजस्वी होता है, अपने आदमियों की अच्छी प्रकार रक्षा करने में समर्थ होता है और लक्ष्मी का कृपापात्र बनता है। लक्ष्मी की कृपापात्र होने का अर्थ है धनी होना। ऐसा व्यक्ति नीरोग रहे। घोड़ा, हाथी, पालकी की सवारी उसे प्राप्त हो। सब लोगों के लिये आनन्दकारक हो। उसकी दानवीरता की प्रशंसा हो और पृथ्वी का श्रेष्ठ स्वामी हो। संक्षेप में लक्ष्मी योग उत्तम राजयोग माना गया है। जो गौरी योग में उत्पन्न हो वह सुन्दर शरीर वाला, राजा का मित्र, सद्गुणों और पुत्रों से युक्त, शत्रुओं को जीतने वाला, प्रशंसित हो। उसकी वंश की सब लोग प्रशंसा करें और उसका मुख कमल के समान हो। संक्षेप में, इसे भी बहुत शुभ योग माना गया है।

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