A Bhava suffers annihilation when the Bhava itself, its lord and its Karaka are devoid of strength and are hemmed in betwixt malefics, or are associated with or aspected by malefic or inimical planets and not by others; or if the 4th, the 8th and the 12th houses or the 5th and the 9th houses from them be occupied by malefics. This will be all the more clear and evident when any two or three of the conditions specified above synchronise.
किसी भाव सम्बन्धी सुख प्राप्ति का अभाव या उस भाव सम्बन्धी दुःख प्राप्ति किन परिस्थितियों में होती है? यह नीचे बताते हैं — (१) यदि भाव, भावेश और भावकारक निर्बल हों (२) यदि भाव, भावेश और भावकारक पापग्रहों के मध्य में हों या पापग्रह किवा शत्रुग्रहों से युत या वीक्षित हों और शुभ ग्रहों से युत-वीक्षित न हों (३) विचारणीय भाव से ४, ५, ८, ९ तथा १२वें स्थानों में पापग्रह हों। ऊपर यह बताया गया है कि भाव, भावेश और भावकारक इन तीनों का विचार करके किसी नतीजे पर पहुँचना चाहिए। अगर ऊपर दिये हुए दो-तीन अनिष्ट योग हों तो निश्चय ही भाव-हानि होती है। उदाहरण के लिए स्त्री पक्ष का विचार करना है, सप्तम भाव भी बलहीन हो, सप्तम भाव का स्वामी भी पापग्रहों के बीच में हो और सप्तम भाव के कारक शुक्र से चौथे, आठवें पापग्रह हों तो निश्चय ही जातक की प्रथम स्त्री की मृत्यु होगी। कहने का तात्पर्य यह है कि कई लक्षण मिलने पर पूरा योग घटित होगा।
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