If planets though by themselves bad, are related (vide XV-30 supra) to a Yogakaraka (planet producing prosperity), they will produce during their Bhuktis good effects leading to affluence and happiness.
पहले बता चुके हैं कि केन्द्रपति और कोणपति का सम्बन्ध होने से दोनों ही ग्रह (केन्द्रपति और कोणपति) राजयोगकारक माने जाते हैं। ऐसे योगकारक ग्रह की महादशा में यदि किसी शुभ-ग्रह की अन्तर्दशा हो — तो चाहे यह शुभ ग्रह महादशा-नाथ से सम्बन्ध न भी करता हो तो भी शुभ-ग्रह की अन्तर्दशा भाग्योदय ही करेगी। अब यह बताते हैं कि यदि कोई ग्रह नैसर्गिक पाप-ग्रह ही (मंगल, शनि) तो भी — यदि वह योगकारक से सम्बन्ध करते हों तो क्या फल होगा। योगकारक से सम्बन्ध करने वाले पाप-ग्रहों की अन्तर्दशा हो तो उसमें योगफल मिलता है। विशेष विवरण के लिये देखिये 'सुगम ज्योतिष-प्रवेशिका' पृष्ठ १२१ तथा १३६।
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