Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 39
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--मैत्रा कंपुष्याश्वि निरभे:सर्वंदिशासु तज्ज्ञ: यात्रा शुभा निरुक्‍ता । वक्री ग्रह: केन्द्रगत: (वा) लग्ने अस्य वर्ग: च अस्य दिनं गमे निषिद्धम | ३८ ॥ अनुराधा, हस्त, पुष्य, अश्विनी इन नक्षत्रों मेंसब दिशाओं की यात्रा पण्डितों नेशुभ कही है। केन्द्र में और लग्न में स्थित वक्रीग्रह का षड़वर्ग और वक्रीग्रह का दिन, ये सब यात्रा में निषिद्ध हैं । ३८ ॥। अयनशद्धि सौम्यायने सुयविध्‌ तदोत्तरां प्राचीं ब्रजेत्तो यदि दक्षिणायने। प्रत्यग्यभाशां च तयोदिवानिशं भिन्नायनत्वेइ5य वधोउन्यथा भवेत्‌ ॥ ३९॥

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