Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 33
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--मधाकरस्वातिमैत्रमूलश्रुत्यम्बुपान्त्यभ॑ च (तथा) याम्यब्राह्मथेशसापं मेषादे: (क्रमात्‌) घातभं न सत्‌ ॥ ३२ ॥। मेष राशिवालों को मघा, वृष राशिवालों को हस्त, मिथुन राशिवालों को स्वाती, कर्क राशिवालों को अनुराधा, सिंह राशिवालों को मूल, कन्या राशिवालों को श्रवण; तुला राशिवालों को शतभिष, वृश्चिक राशिवालों को रेवंती, धनु राशिवालों कोभरणी, मकर राशिवालों को रोहिणी, कुम्भ मुहत्तंचिन्तामणि श्द० राशिवालों को आर्द्रा और मीन राशिवालों. को आइलेषा नक्षत्र घातक होता है । ये यात्रा आदि में निषिद्ध हैं ॥ ३२ ॥ घातनक्षत्र चक्र सिल्क कि: कु० न «| निय बृ० | मि० ।क्ाह्चग का हु | बृ० |ध० “डे कस एले० घातनक्षत्न | भ० । > | रे० ० तिथियोगिनी नव ९ भूम्यः १ शिव ११ वह्लयो ३ 5क्ष ५ विश्वे ३१ एक १२ कृता: ४ शक्त १४ रसा ६ स्तुरड्ध ७ तिथ्यः द्विर दिज्ञो १९० 5$मा ३० वसवदच ८ पूर्बतः स्यु- १५ । स्तिथयः सम्मुखवामगा न दशस्ताः॥ ३३॥

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