अन्वयः--धमंगे भास्करे, वित्तमोक्षे शशी शस्यते : वित्तग भास्करे, धम्ममोक्षस्थित: शशी; कामगे भास्करे, धर्ममोक्षार्थथ: शशी शोभन: ; मोक्षग भास्करे, केवलं धमंग: शशी शोभन:ः प्रोच्यते ॥ १६ ।। धर्ममार्ग में सूये होऔर अथंमार्ग या मोक्षमार्ग में चन्द्रमा हो तो शुभ है, तथा अर्थंमार्ग में सूय॑ और धर्ममार्ग या मोक्षमार्ग में चन्द्रमा हो तो शुर्भ है, तथा काममार्ग में सूय॑ और धर्ममार्ग या मोक्षमार्ग या अथंमा र्ग में चन्द्रमा हो तो शुभ है, तथा मोक्षमार्ग में सूर्य और धरमंमार्ग में चन्द्रमा हो तो शुभ है, और इससे विपरीत अशुभ है ॥ १९॥ पौषादि मासों की परीवादि तिथियों में पूर्वादि दिज्ञाओं की यात्रा का शुभाशुभ फल पौष पक्षत्यादिका द्वादशवं तिथ्यो माघादौ द्वितीयादिकास्ता:। कामात्तित्नरः स्पुस्तृतीयादिवच्च याने प्राच्यादो फल॑ तत्न वक्ष्ये ।॥ २० ॥।
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