Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
अन्वयः--यदि देत्येज्य: अभिमुखदक्षिणे स्थात् (तदा) शिशुगर्भिणीनवोढाः न गच्छेयु: । हि चेत् [यदि] बाल: ब्रजति तदा विपद्यते, नवोढा ब्रजति तदा वन्ध्या भवर्ति, च गर्भिणी अगर्भा भवति ॥ २ ।! यदि शुक्र सामने या दाहिनी ओर पडठते हों तो बालकयुकत, गर्भवती और नववधू स्त्रियाँ दूसरी बार अपने पति के घर को न जायें; क्योंकि सम्मुख या दक्षिण शुक्र के रहते स्वामी के घर जानेवाली बालकयुकत स्त्री का बालक मर जाता है, गर्भवती का गर्भ नष्ट हो जाता हैऔर नववध् स्त्री का यदि द्विरागमन होता है तो वह वन्ध्या होंती है || २ ॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.