Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
हस्त, अद्विनी; पुष्य, अभिजित्, ये चार नक्षत्र और बृहस्पति दिन, इनकी क्षिप्र और लघ॒ संज्ञा है। इनमें बाजार. का कायें, स्त्री-सम्भोग, शास्त्रादि का ज्ञान, आभूषणों का बनवाना और पहिनत़ा, चित्रकारी, गाना-बजाना इत्यादि कला और आदि पद से चरसंज्ञक नक्षत्रों का भी काय॑, वे सब सिद्ध होते हैं ।। ६॥।
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