अन्वयः--सूर्यादिवारे (क्रमेण) सूर्यशपञ्चाग्निरसाष्टनन्दाः, वेदाज्भसप्ताश्वि- गजाडूशेला:, सूर्याज्ज्सप्तोी रগগोदिगीश।: तिथयः (क्रमात् ) दग्धाः, विषाख्या:, हुताशना: भवन्ति च (तथा) अर्कात् (क्रमेण) मघाविशाखाशिवमूलवक्िः ब्राह्मंकर: यमघण्टका: भवन्ति । (इमे ) शुभ विवर्ज्या: गमने तु अवश्यं (विवर्ज्या:) ।। ८-८ ।॥। रविवार को द्वादशी, सोमवार को एकादशी, मंगल को पड्चमी, बुधवार को तीज, बृहस्पति को छठि, शुक्रवार को अष्टमी, शनेइ्चर को नवमी हो तो दग्धधोग होता है तथा रविवार को चौथि, सोमवार को छटि, मंगल को सप्तमी, ' बुधवार को दुइज, बृहस्पति को अष्टमी, शुक्रवार को नवमी, शनेइचर को सप्तमी हो तो विषाख्ययोग होता हैऔर रविवार को द्वादशी, सोमवार को छठि, मंगल को सप्तमी, बुधवार को अष्टमी, बृहस्पति को नवमी, शुक्रवार को दशमी और शनंश्चर को एकादशी हो तो हुताशनयोग होता है ॥| ८ ॥।
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