Auspicious effects like availability of sweetish preparations, abnormal gains in profession and increase in cattle wealth, will be derived from the very commencement of the Antardasa of Ketu in the Dasa of Venus, if Ketu be in his sign of exaltation, in his own sign or be related to a yogakaraka planet or be possessed of positional strength.
केतु अन्तर्दशा फल :- शुक्रस्यान्तर्गते केतौ स्वोच्चे वा स्वरक्षगे ऽथवा । योगकारक सम्बन्धे स्थानवीर्यसमन्विते ।।66।। भुक्त्यादौ शुभमाधिक्यं नित्यं मिष्टान्नभोजनम् । व्यवसायात्फलाधिक्यं गोमहिष्यादि लाभकृत् ।।67।। धनधान्यसमृदिधश्च संग्रामे विजयी भवेत् । भुक्त्यन्ते हि सुखं चैव भुक्त्यादौ मध्यमं फलम् ।।68।। मध्ये मध्ये महत्कष्टं पश्चाद् आरोग्यमादिशेत् । शुक्र दशा में केतु की अन्तर्दशा हो तथा केतु उच्च, स्वक्षेत्र, योग कारक ग्रह से युक्त, या योग कारक से सम्बन्ध करने वाला या केन्द्र त्रिकोण में या उपचय भावों में इन्हीं भावेशों से युक्त दृष्ट हो तो प्रारम्भ में बहुत शुमफल, गाय भैंस का लाम, उत्तम भोजन, व्यवसाय में लाम, धनधान्य वृदिध, युद्ध में विजय होती है। अन्त में सुख अधिक होता है। मध्य में बीच-बीच में कष्ट भी होता रहता है। अतः आदि व अन्त में उत्तरोत्तर अधिक शुम फल होते हैं।
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.