The remedial measures to obtain relief from the above evil effects, are Havana with sesamum seeds, Mrityunjaya Japa, Durga-saptashati Patha (by self or through a Brahmin).
भुक्त्यादौ विविधा पीडा पितृमातृजनावधि । दारपुत्रादिपीडा च परदेशादिविभ्रमः ।।56।। व्यवसायात् फलं नेष्टं गोमहिष्यादिहानिकृत् । दितीयसप्तमाधीशे देहबाधा भविष्यति ।।57।। तददोषपरिहारार्थ तिलहोमं चरेद् बुधः । मृत्युंजयजपं कुर्याच्चण्डीपाठमथापि वा ।।58।। दशेश या लग्न से 8.12 भावगत शनि या नीचादिगत शनि की अन्तर्दशा में प्रारम्भ में अनेक प्रकार की पीडा, माता-पिता समेत सबको कष्ट, परदेश में भ्रमण, व्यवसाय में अवनति, दुधारू पशुओं की हानि होती है। यदि शनि 2.7 भावेश हो तो शरीर कष्ट होता है। दोष निराकरण के लिए, तिल का हवन, मृत्युंजय जप एवं चण्डीपाठ करना चाहिए ।
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