Effects like great enjoyments, visits of friends and kinsmen recognition from the king (government) birth of a daughter, visits to holy places and sacred shrines, conferment of authority by the king (government), will be derived in the Antardasa of Saturn in the Dasa of Venus, if Saturn be in his sign of exaltation, in his own sign in kendra, trikona or in his own Navamsa.
शनि अन्तर्दशा फल :- शुक्रस्यान्तर्गते मन्दे स्वोच्चे तु परमोच्चगे । स्वर्षकेन्द्रत्रिकोणस्थे तुंगांशे स्वांशगेऽपि वा ।।52।। तदभुक्तौ बहुसौख्यं स्यादिष्टबन्धुसमागमः । राजद्वारे च सम्मानं पुत्रिकाजन्मसम्भवः ।।53।। पुण्यतीर्थफलावाप्तिर्दानधर्मादिपुण्यकृत् । स्वप्रभोश्च फलावाप्तिः नीचस्थे क्लेशभाग्भवेत् ।।54।। देहालस्यमवाप्नोति तथायाद्धिकव्ययम् । तथाष्टमे व्यये मन्दे दायेशाद् वा तथेव च ।।55।। शुक्र दशा में शनि की अन्तर्दशा हो तथा शनि उच्च, परमोच्च, स्वराशि, केन्द्रगत, त्रिकोणगत, उच्च या स्व नवांशगत हो तो इस दशा में बहुत सुख, इष्ट जनों से समागम, राजद्वार पर सम्मान, पुत्री का जन्म, पुण्यतीर्थों की यात्रा होती है । यदि शनि नीचगत हो तो अनेक क्लेश, शरीर में आलस्य, आय से अधिक व्यय होता है। यदि लग्न या दशापति से 8.12 में शनि हो तो भी अशुम फल होता है।
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