There will be physical distress if Jupiter be the lord of the 2nd and the 7th. The remedial measure to obtain relief from the above evil effects is Mrityunjaya Japa.
दायेशात्षष्ठराशिस्थे व्यये वा पापसंयुते । राजचौरादिपीडा च देहपीडा भविष्यति ।।49।। आत्मरुग्बन्धुकष्टं स्यात्कलहेन मनोव्यथा । स्थानच्युतिं प्रवासं च नानारोगं समाप्नुयात् ।।50।। द्वितीयसप्तमाधीशे देहबाधा भविष्यति । तद्दोषपरिहारार्थ महामृत्युंजय जपेत् ।।51।। यदि बृहस्पति, दशेश शुक्र से 6.12 भाव में हो, पापयुक्त हो तो राजा व चोर आदि से पीड़ा, शरीर कष्ट होता है। स्वयं को रोग, बन्धु बन्धवों को कष्ट, कलह के कारण मनोव्यथा, स्थान परिवर्तन, प्रवास, नाना प्रकार के रोग होते हैं। यदि गुरु 2.7 भावेश हो तो शरीर कष्ट होता है। इसके निवारण के लिए महामृत्युंजय मन्त्र का जप करना चाहिए ।
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