There will be inauspicious effects on self and parents and antagonism with people, if Rahu be associated with a malefic in the 8th or the 12th from the lord of the Dasa (Venus). Physical distress will be caused if Rahu be the lord of the 2nd or the 7th from the Ascendant.
दायेशाद्रन्ध्रभावस्थे व्यये वा पापसंयुते ।।42।। अशुभं लभते कर्म पितृमातृजनावधि । सर्वत्रजनविद्वेषं नानारूपं द्विजोत्तम ।।43।। दितीये सप्तमे वापि देहालस्यं विनिर्दिशेत् । तद्दोषपरिहारार्थ मृत्युंजयमनुं जपेत् ।।44।। यदि दशेश से 8.12 में राहु हो या पापयुक्त हो तो अशुम कार्यो में लिप्त रहने के अवसर आते हैं। माता-पिता व स्वयं का भी अशुम होता है। सर्वत्र लोगों से द्वेष होता है। यदि राहु 2.7 भाव में हो तो देह में शिथिलता होती है। इसके परिहार के लिए मृत्युंजय मन्त्र का जप करना चाहिए ।
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