Construction of a new house, availability of sweet preparations, happiness to wife and children, companionship with a friend, giving grains etc. in charity, beneficence of the king (Government) gain of clothes, conveyances and ornaments, success in business, increase in the number of cattle, gain of garments by performing journeys in the western direction, etc., will be the results, if Venus be in his sign of exaltation, in his own sign or be in exalted or own Navamsa.
। ।अथ शुक्रान्तदशाफलाध्यायः । । शुक्रदशा में शुक्रान्तर:- अथ स्वान्तर्गते शुक्रे लग्नात्केन्द्रत्रिकोणगे । लाभे वा बलसंयुक्ते तदभुक्तौ च शुभं फलम् ।।1।। विप्रमूलादधनप्राप्तिर्गोमहिष्यादि लाभकृत् । पुत्रोत्सवादिसन्तोषो गृहे कल्याणसम्भवः ।।2।। सम्मानं राजसम्मानं राज्यलाभो महत्सुखम् । स्वोच्चे वा स्वर्षगे वापि तुंगांशे स्वांशकेऽपि वा ।।3।। नूतनालय निर्माणं नित्यं मिष्ठान्नभोजनम् । कलत्रपुत्रविभवं मित्रसंयुक्तभोजनम् ।।4।। अन्नदानं प्रियं नित्यं दानधर्मादिसंग्रहः । महाराजप्रसादेन वाहनाम्बरभूषणम् ।।5।। शुक्र महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा हो तथा शुक्र लग्न से 1.4.5.7.9.10.11 में हो या बली हो तो उसकी अन्तर्दशा में शुम फल होते हैं । ब्राह्मणों की कृपा या सहयोग से धन लाम, पशुघन का लाम, पुत्र से सम्बन्धित कोई उत्सव, घर में कल्याण कार्य (उत्सव), सज्जनों से सम्मान, राजसम्मान, राज्यलाम, सुख होता है । यदि शुक्र उच्च, स्वक्षेत्री, उच्च नवांश या स्वनवांश में हो तो नए घर का निर्माण, सदैव मधुर भोजन, स्त्री-पुत्रादि का सुख, मित्रों के साथ प्रीतिभोज, अन्नदान, सदैव मन में सन्तोष, दान धर्म के अवसर, बड़े लोगों की सहायता से भौतिक सुखो की प्राप्ति होती है ।
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