There will be evil influence of the planets if the Sun be the lord of the 2nd or the 7th from the Ascendant. Worship of the Sun is the remedial measure to obtain relief from the above evil effects.
चन्द्रान्तर्दशा फल :- शुक्रस्यान्तगति चन्द्रे केन्द्रलाभत्रिकोणगे । स्वोच्चे स्वक्षेत्रगे चैव भाग्यनाथेन संयुते ।।19।। शुभयुक्ते पूर्णचन्द्रे राज्यनाथेन संयुते । तद्भुक्तौ वाहनादीनां लाभो गेहे महत्सुखम् ।।20।। महाराजप्रसादेन गजान्तैश्वर्यमादिशेत् । महानदीस्नानपुण्यं देवब्राह्मणपूजनम् ।।21।। गीतवाद्यप्रसंगादि विद्वज्जनविभूषणम् । गोमहिष्यादिवृदिधश्च व्यवसायेऽधिकं फलम् ।।22।। भोजनाम्बरसौख्यं च बन्धुसंयुक्तभोजनम् । शुक्र दशा में चन्द्रमा की अन्तर्दशा हो ओर चन्द्रमा, लग्न से केन्द्र, त्रिकोण, लाम, उच्च, स्वक्षेत्र, नवमेश युक्त, शुभयुक्त, दशमेश युक्त, पूर्ण बिम्ब हो तो वाहन आदि का लाम, घर में अधिक सुख, बड़े लोगों के सहयोग से बहुत ऐश्वर्य की प्राप्ति, बड़ी पवित्र गंगादि नदी में स्नान का पुण्य, देवता व ब्राह्मणों की पूजा, आमोद-प्रमोद गीत-वाद्यादि, व्यवसाय में अधिक लाम, भौतिक सुखो की प्राप्ति तथा संयुक्त परिवार का सुख होता है ।
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