There will be physical distress if the Sun be the lord of the 2nd or the 7th from the Ascendant. The worship of the Sun is the remedial measure to obtain relief from the above evil effects.
चन्द्रान्तर्दशा फल :- मन्दस्यान्तरगति चन्द्र जीवदृष्टिसमन्विते । स्वोच्चे स्वक्षेत्रकेनदरस्थे त्रिकोणे लाभगेऽपि वा ।।42।। पूर्णे शुभग्रहयुक्तै राजप्रीतिसमागमः । महाराजप्रसादेन वाहनाम्बरभूषणम् ।।43।। सौभाग्यं सुखवृदिध च भृत्यानां परिपालनम् । पितृमातुकुले सौख्यं पशुवृदिधः सुखावहा ।।44।। शनि महादशा मे चन्द्रमा का अन्तर हो तथा चन्द्रमा पर ब्रहस्पति की दृष्टि हो या चन्द्रमा उच्चगत्, स्वक्षेत्री, त्रिकोणगत, लामगत या पूर्ण हो या शुम ग्रह से युक्त. हो तो राजाओं से मित्रता व मिलन, बड़े लोगों कं सहयोग से वाहनादि सुखं की प्राप्ति, सौमाग्यवृदिध, सुखवृदिघध, नौकरों को पालने का स्तर, मातृकुल व पित्ुकुल में सुख एवं पशुवृदिध होती दै ।
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