There will be heart disease, defamation, loss of position, mental agony, separation from close relatives, obstacles in industrial ventures, fevers, fears, loss of kinsmen, loss of articles dear to the person, if the Sun be in the 8th or the 12th from the ascendant or the lord of the Dasa (Saturn).
लग्नाष्टमव्यये सूर्ये दायेशदवा तथेव च ।।38।। हृद्रोगो मानहानिश्च स्थानभ्रंशो मनोरुजा । इष्टबन्धुवियोगश्च परिश्रमविनाशनम् ।।39।। तापज्वरादिषीडा च व्याकुलत्वं भयं तथा । आत्मसम्बन्धिमरणम् इष्टवस्तु वियोगकृत् ।।40।। द्वितीयद्यूननाथे तु देहबाधा भविष्यति । तददोषपरिहारार्थ सूर्यपूजां च कारयेत् ।।41।। यदि लग्न या दशेश से 8.12 में सूर्यं हो तो हृदयरोग, मानहानि, मानसिक व्यथा के कारण पद या स्थान की हानि, इष्टजनों का वियोग, परिश्रम की असफलता, ताप ज्वर पीडा, व्याकुलता, भय निजी का शोक होता है। यदि सूर्य 2.7 भावेश हो तो शरीर कष्ट होता हे । इस दोष की शान्ति के लिए सूर्य पूजा कराना चाहिए ।
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