Divide the 12 houses into 3 sections. There will be sufferings and distress in that part of the life which is represented by the section of the birth chart with more malefics. There will be happiness etc. in the part of the life represented by the section of the birth chart containing more benefics. There will be mixed results in that part of the life when the relative section of the birth chart has equal number of benefics and malefics. The houses from the Ascendant up to the 4th signify childhood, those from the 5th to 8th youth (adulthood), and those from the 9th to 12th represent old age.
दशावदिह भावानां कृत्वा खण्डत्रयं बुधः । । 9 । । पश्येत् पापसमारूढं खण्डे कष्टकरं वदेत् । सौम्यर्युक्तं शुभं ब्रूयात् मिश्रैर्मिश्रफलं यथा । । 10 । । क्रमाद् बाल्याद्यवस्थासु खण्डत्रयफलं वदेत् । खण्डत्रयफलं ज्ञात्वा दशाफलमुदीरयेत् । । 11 । । लग्नादि 12 भावों के तीन खण्ड करने चाहिए । जिस खण्ड में पाप ग्रह हों, आयु का वही खण्ड (बचपन, जवानी, बुढ़ापा) कष्टकर होता है । शुभ ग्रह युक्त खण्ड शुभ व मिश्रित ग्रह युक्त मिश्रित फलवाला होता है । खण्डानुसार फल की कल्पना करके दशाफल से भी समन्वय करना चाहिए । खण्डविभाग में मतभेद : (i) लग्न से चतुर्थ सहित 1, 2, 3, 4 भाव प्रथम खण्ड; 5, 6, 7, 8 मध्यम खण्ड; 9, 10, 11, 12 तृतीय खण्ड — यह एक मत है । (ii) कुछ आचार्य मीन से मिथुन तक प्रथम, कर्क से तुला तक द्वितीय तथा वृश्चिक से कुम्भ तक अन्तिम खण्ड मानते हैं — यह द्वितीय मत है । (iii) चारों केन्द्र स्थान प्रथम खण्ड, चारों पणफर मध्यखण्ड, चारों आपोक्लिम तृतीय खण्ड — यह तृतीय मत है । (iv) एक मतानुसार रेखायोग करते समय खण्ड निर्धारण में 8, 12 भाव की रेखाओं को नहीं जोड़ा जाता । यद्यपि बहुमत मीनादि से खण्ड निर्णय के पक्ष में है, किन्तु हम लग्नादि या केन्द्रादि पक्ष को अधिक उपादेय समझते हैं । जिस खण्ड में अधिक रेखायोग हो, वही सुखप्रद होता है । हमारे उदाहरण में खण्ड निर्धारण : भाव 1, 2, 3, 4 की रेखाएँ 29+34+37+28 = 128; भाव 5, 6, 7, 8 की रेखाएँ 29+32+21+24 = 122; भाव 9, 10, 11, 12 की रेखाएँ 30+37+34+35 = 136 । मध्यम खण्ड में रेखायोग कम है, किन्तु बुध, शुक्र व कारक ग्रह वहाँ रहने से मध्यावस्था में विशेष उन्नति होनी चाहिए । केन्द्रादि मत से 29+28+27+37 = 129 प्रथम खण्ड; 34+39+24+34 = 131 मध्यम खण्ड; 37+32+30+35 = 134 अन्तिम खण्ड है । मध्यम खण्ड या प्रौढावस्था तथा वृद्धावस्था उत्तरोत्तर उन्नतिदायिनी है ।
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.