The Sage said — O Brahmin! Write down a birth chart with 12 houses including the Ascendant. Then insert the total of the rekhas in all the Ashtakavargas of the planets in the rasi concerned. The Ashtakavarga with such rekhas is called the Samudaya-ashtakavarga or the Aggregational Ashtakavarga. From this should be judged good and adverse effects of the birth chart.
पराशर उवाच — हे मैत्रेय ! द्वादशारं लिखेच्चक्रं जन्मलग्नादिभर्युतम् । सर्वाष्टिकफलान्यत्र संयोज्य प्रतिभं न्यसेत् । । 1 । । समुदायाभिधानोऽयमष्टवर्गः समुच्यते । अतः फलानि जातानां विज्ञेयानि द्विजोत्तम ! । । 2 । । पराशर बोले — हे मैत्रेय ! 12 कोष्ठकों वाला चक्र (कुण्डली) बनाकर उसमें जन्मलग्नादि 12 भावों में स्थित राशियों को लिखें । आठों अष्टकवर्गों में एक-एक राशि में जितनी रेखाएँ हों, उन्हें जोड़कर तत्तत् राशि में लिखने से 'समुदायाष्टकवर्ग चक्र' बन जाता है । इसके आधार पर जातक का फल कहा जाता है । हमारे उदाहरण में कर्क लग्न है । कर्क राशि में सूर्यादि आठों अष्टकवर्ग की रेखाओं का योग क्रमशः 4+4+4+5+4+4+4+0 = 29 है । अतः लग्न राशि में 29 रेखाएँ हैं । इसी तरह सब राशियों की रेखाओं का योग करके यह चक्र बना लिया गया ।
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