O Brahmin, these are the effects for Dhūma etc. (and Prāṇapada ascendant). Before declaring these results, effects of the Sun and other planets should be wisely conceived by their positions, relations and aspects apart from their strength or weakness.
अप्रकाश-ग्रह-फल की अनिवार्यता (समापन-कोलोफोन): (श्लोक 86 = मिश्र 85) इस प्रकार मैंने (पराशर) धूमादि अप्रकाश-ग्रहों के भाव-गत फल कहे हैं, हे ब्राह्मण! तथा सूर्यादि प्रकाश-ग्रहों के फल भी पहले कहे गए। (श्लोक 87 = मिश्र 86) पहले अप्रकाश-ग्रहों का फल विचार करके बाद में सूर्यादि प्रकाश-ग्रहों के फल का समन्वय करना चाहिए। ग्रहों पर दृष्टि-वशात् तथा बलाबल-विवेक से शुभ-अशुभ फल का निर्णय शरीरियों (जीवों) को कहना चाहिए। (मिश्रजी की व्याख्या: जिस भाव का फल अप्रकाश-ग्रहों से अशुभ हो और प्रकाश-ग्रहों से शुभ आए तो मध्यम फल समझें; दोनों से शुभ आने पर अत्यन्त शुभ मानना चाहिए।)
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