O excellent of the Brahmins, if the 12th from Lagna-Pada is unaspected as the 11th from Lagna-Pada is being aspected by a planet, then the gains will be uninterrupted.
अति-लाभ-योग (चार-स्तरीय उत्तरोत्तर क्रम): (अ) पद से ग्यारहवें भाव को ग्रह देखे एवं द्वादश भाव को न देखे तो सरलता से लाभ होता रहता है। (आ) पद से एकादश में बहुत से ग्रहों का योग या दृष्टि हो तो बहुत लाभ — अर्थात् अधिक ग्रहों के दृग्योग से अधिकाधिक लाभ योग है। इसकी अपेक्षा यदि ग्यारहवाँ भाव अर्गला युक्त भी हो तो और अधिक लाभ होगा। अधिक ग्रहों की अर्गला से और अधिक लाभ योग होगा। (इ) शुभ ग्रह की अर्गला से और अधिक, उच्चग्रह की अर्गला से उससे भी अधिक, एकादशेश शुभ ग्रह हो तथा एकादशस्थ को देखे या भोग करे तो और अधिक लाभ होगा। (ई) यदि पद से एकादश को लग्नेश व भाग्येश देखें तो और अधिक — अर्थात् उक्त क्रम में उत्तरोत्तर अधिक प्रबल लाभ योग होता है।
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