There will be physical distress, agony, obstacles in ventures, lethargy, defamation, death of parents, if Saturn be associated with a malefic, in the 6th, 8th or the 12th from the lord of the Dasa (Ketu). Fear of premature death may be expected if Saturn be the lord of the 2nd or 7th from the Ascendant.
दायेशात्षष्ठरिःफे वा ह्यष्टमे पापसंयुते । देहतापो मनस्तापः कार्ये विघ्नो महद्भयम् ।।65।। आलस्यं मानहानिश्च पित्तमात्रोर्विनाशनम् । दितीयद्यूननाथे तु ह्यपमृत्युभयं भवेत् ।।66।। तददोषपरिहारार्थ तिलहोमं च कारयेत् । कृष्णां गां महिषीं दद्यादायुरारोग्यवृदधये ।।67।। यदि महादशेश से शनि 6.8.12 में हो या पापयुक्त हो तो शरीर में सन्ताप (कष्ट), मानसिक कष्ट, काम में रुकावट, अधिक भय, आलस्य, मानहानि, माता-पिता का वियोग होता है । यदि शनि 2.7 भावेश हो तो अपमृत्यु का भय होता है। इसकी शान्ति के लिए काली गाय या भैंस का दान करें व काले तिलों से (घी मिलाकर) हवन करें ।
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