Fear of premature death will be caused if Jupiter be the lord of the 2nd or the 7th from the Ascendant. The remedial measures to obtain relief from the above evil effects are Mrityunjaya Japa, recitation of Shiva Sahasranama.
शनि अन्तर्दशा फल :- केतोरन्तगति मन्दे स्वदशायां तु पीडनम् । बन्धो क्लेशो मनस्तापश्चतुष्पाज्जीवलाभकृत् ।।60।। राजकार्यकलापेन धननाशो महद्भयम् । स्थानच्युतिः प्रवासश्च मार्गे चौरभयं भवेत् ।।61।। आलस्यं मनसो हानिश्चाष्टमे व्ययराशिगे । केतु दशा में शनि की अन्तर्दशा हो तथा शनि 8.12 भाव में या पाप फलप्रद हो तो पीडा, बन्धन, क्लेश, मन में सन्ताप, चौपाए धन का लाम, राजा के कार्य अथवा सरकारी काम में धनहानि, भय का अवसर, स्थान परिवर्तन या स्थान हानि, परदेश वास, रास्ते में चोर आदि का भय, आलस्य, मन में उदासी निर्बलता होती है।
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