Effects like increase in wealth and grains, beneficence of the king, enthusiasm, gain of conveyances etc., celebration like birth of a son at home, performance of pious deeds, yajanas, conquest of the enemy and enjoyments, will be derived in the Antardasa of Jupiter in the Dasa of Ketu, if Jupiter be in his sign of exaltation, in his own sign or be associated with the lord of the Ascendant, the 9th or the 10th in a kendra or trikona from the Ascendant.
गुरु अन्तर्दशा फल :- केतोरन्तरगति जीवे केन्द्रे लाभे त्रिकोणगे । स्वोच्चे स्वक्षेत्रगे वापि लग्नाधिपसमन्विते ।।50।। कर्मभाग्याधिपैर्युक्ते धनधान्यार्थसम्पदम् । राजप्रीतिं तथोत्साहमश्वान्दोल्यादिकं वदेत् ।।51।। गृहे कल्याणसम्पत्ति पुत्रलाभमहत्सुखम् । पुण्यतीर्थमहोत्साहं सत्कर्म च महोत्सवम् ।।52।। इष्टदेवप्रसादेन विजयं कार्यलाभकृत् । राजसंलापकार्याणि नूतनप्रभुदर्शनम् ।।53।। यदि केतु में गुरु की अन्तर्दशा हो तथा बृहस्पति केन्द्र, त्रिकोण, लामस्थान, स्वोच्चगत, स्वक्षेत्र, या लग्नेश के साथ हो या 9.10 भावेश से युक्त हो तो इस दशा में धन-धान्य की वृदिध, सम्पत्ति-प्राप्ति, राजा से मित्रभाव, मन में उत्साह, घोड़े पालकी आदि की सवारी (वाहन लाम), घर में कल्याण कार्य, पुत्र लाम, बहुत सुख, पुण्यतीर्थं में स्नान, सत्कार्य, महान् उत्सव, इष्टदेव की कृपा से विजय व कार्य में सर्वत्र लाभ, राजा से भेंटवार्ता, नए अधिकारी या नए राजा से भेंट होती है।
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