There will be recognition from the king, great popularity and reputation and happiness from children and friends, if Mars be in kendra, trikona, the 3rd or the 11th from the lord of the Dasa (Ketu).
दायेशात्केन्द्रकोणे वा दुश्चिक्ये लाभगेऽपि वा । राजप्रीतियशोलाभः पुत्रमित्रादि सौख्यकृत् ।।39।। तथाष्टमे व्यये भौमे दायेशाद्धनगेऽपि वा । दुतं करोति मरणं विदेशे चापदं भमम् ।।40।। प्रमेहमूत्रकृच्छ्रादि चौरादिनृपीडनम् । कलहादिव्यथायुक्तं किंचित्सुखविवर्धनम् ।।41।। दितीयद्यूननाथे तु तापज्वरविषादभयम् । दारपीडा मनःक्लेशमपमृत्युभयं भवेत् ।।42।। अनड्वाहं प्रदद्यात् तु सर्वसम्पत्सुखावहम् । ततः शान्तिमवाप्नोति भौमदेव प्रसादतः ।।43।। दशापति से केन्द्रगत, त्रिकोणगत, 3.11 भाव में मंगल हो तो राजा से प्रीति, यश, पुत्रों व मित्रों का सुख होता है । यदि दशेश से 8.12 में मंगल हो या दशेश से द्वितीय में मंगल हो तो मृत्यु का अचानक सामना करना पडता है, विदेश में कोई बडी मुसीबत में फंसना, वृथा भ्रमण, प्रमेह व मूत्रादि रोगों से पीडा, राजा व चोर आदि की ओर से भय, कलह के कारण मानसिक क्लेश, साधारण सुख होता है । यदि मंगल 2.7 भावेश हो तो ताप ज्वर, विषैला संक्रमण, स्त्री को कष्ट, मन में क्लेश, अपमृत्यु का भय होता है । शान्ति के लिए बैल या बड़े का दान करना चाहिए, तब मंगल की कृपा से सब मंगल ही होता है।
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.