Heart disease, defamation, destruction of wealth and cattle, distress to wife and children, instability of mind etc., will be the results, if Ketu be in his sign of debilitation and be in the 8th or the 12th from the Ascendant alongwith a combust planet.
नीचास्तखेटसंयुक्ते द्यष्टमे व्ययगेऽपि वा ।।3।। हृद्रोगो मानहानिश्च धनधान्यपशुक्षयः । दारपुत्रादिपीडा च मनश्चांचल्यमेव च ।।4।। यदि केतु नीचगत या अस्तंगत ग्रह के साथ हो या 8.12 भाव में हो तो हृदय रोग, मानहानि, धनधान्य की हानि पशुधन की हानि, स्त्री-पुत्रादि को पीड़ा, मन में चंचलता होती है । दितीयद्यूननाथेन सम्बन्धे तत्र संस्थिते । अनारोग्यं महत्कष्टमात्मबन्धुवियोगकृत् ।।5।। दुगदिवी जपं कुर्यात् मृत्युंजयजपं चरेत् ।।6।। यदि केतु 2.7 भावेशों से सम्बन्ध करे या 2.7 भावों में ही स्थित हो, तो शरीर में अस्वस्थता, बहुत कष्ट, अपने लोगों से वियोग होता है । शान्ति के लिए दुर्गा पाठ व मृत्युंजय जप करना चाहिए ।
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