EFFECTS OF ASPECTS ON KETU IN KĀRAKĀṀŚA: If Ketu is in Kārakāṁśa in aspect to a malefic, one's ears will be severed or he will suffer from diseases of ears. Venus aspecting denotes one initiated into religious order. One will be devoid of strength if Mercury and Saturn aspect. If Mercury and Venus aspect, he will be the son of a female slave or of a female remarried. With Saturn's aspect one will perform penance or be a servant or will be a pseudo-ascetic. Venus and the Sun together aspecting will make one serve the king. Thus, O Brahmin, are told briefly the effects of Kārakāṁśa.
कर्ण-रोग, दीक्षा, अवैध सन्तानादि योग: आत्मकारक के नवांश में केतु भी साथ हो तथा पाप ग्रह उसे देखते हों तो मनुष्य को कानों में रोग होता है या कान कट जाते हैं। यदि उक्त केतु पर शुक्र की दृष्टि हो तो मनुष्य दीक्षा ले लेता है, अर्थात् संन्यासी हो जाता है। यदि उसी केतु पर बुध-शनि की दृष्टि हो तो मनुष्य नपुंसक होता है। यदि बुध-शुक्र देखें तो दासीपुत्र अर्थात् अज्ञात-पिता की सन्तान या माता के दूसरे पति से उत्पन्न होता है, अथवा सब बातों को दो बार बोलता है। यदि शनि देखता हो तथा साथ में किसी अन्य ग्रह की दृष्टि भी हो तो मनुष्य तपस्वी या चपरासी, प्रेष्य, चतुर्थ-श्रेणी कर्मचारी होता है। यदि केवल शनि देखे तो मनुष्य केवल संन्यासियों का वेश ही पहनता है, वास्तव में संन्यासी नहीं होता। यदि आत्मकारक-नवांश में स्थित केतु को सूर्य व शुक्र देखें तो मनुष्य राजा का विशेष सन्देशवाहक, दूत, राजदूत आदि होता है।
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