Effects like nervous disorder, fever, laziness or reluctance in the performance of good deeds, indulgence in sins, antagonistic attitude towards all, separation from kinsmen and distress without reasons, will be experienced, if the Sun be in the 6th, the 8th or the 12th from the Ascendant or the lord of the Dasa (Jupiter).
लग्नाष्टमव्यये सूर्ये दायेशादवा तथैव च । शिरोरोगादि पीडा च ज्वरपीडा तथेव च ।।53।। सत्कर्मसु तदा हीनः पापकर्मचयस्तथा । सर्वत्र जनविद्वेषो निजबन्धुवियोगकृत् ।।54।। अकस्मात्कलहश्चैव जीवस्यान्तर्गते रवौ । द्वितीयद्यूननाथे तु च्यपमूत्युभयं भवेत् ।।55।। तददोषपरिहारार्थम् आदित्यह्वदयं जपेत् । सर्वपीडोपशमनं दिनेशस्य प्रसादतः ।।56।। यदि सूर्य लग्न या दशेश से 6.8.12 मेहो तो सिर मे पीड, ज्वरपीडा, अच्छे कार्यो में हानि, पाप मे वृदिध, सब लोगों से मनमुटाव, अपने बन्धुओं से वियोग, अचानक कलह आदि फल होते हैँ । यदि सूर्य 2.7 भावेश हो तो अपमृत्यु का भय होता है । इसकी शान्ति के लिए आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करने से श्री सूर्यदेव प्रसन्न होते हैँ ।
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