If a planet whose Daśā is otherwise considered favourable be posited in a māraka house, or if the rāśi in which his Daśā comes to an end be aspected by Venus or Moon, there will be in his Daśā displeasure of government and loss of wealth.
इदं फलं शनेः पाके न विचिन्त्यं द्विजोत्तम ! । दशाप्रदे नक्रराशौ न विचिन्त्यमिदं फलम् । (क) जिस ग्रह की स्थिति मारक स्थान में हो अथवा दशा राशि मारक स्थानों मे हो अथवा दशान्त के समय जो राशीश ग्रह या राशि एक साथ शुक्र व चन्द्र से दृष्टयुत हो तो उस दशा मेँ राजकोप से धनहानि होती है । (ख) यदि दशान्त मे राशीश या दशापति शत्रु क्षेत्री हो या राहु से युक्त दृष्ट हो तो वह दशा भी शुभ नहीं होती । (ग) उक्त विचार शनि की दशा में या मकर राशि की दशा में नहीं समझना चाहिए ।
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