Agony, anxiety, danger from diseases, antagonism with wife and kinsmen, wrath of the king (government), quarrels, loss of wealth, danger from Brahmins (wrath of Brahmins), will be the results if Jupiter be weak and be in the 6th, the 8th or the 12th from the lord of the Dasa (Mercury).
अंगतापश्च वैकल्यं देह कधा भविष्यति । कलत्रबन्धुवैषम्यं राजकोपोधनक्षयः ।।64।। अकस्मात्कलहात्भीतिः प्रमादो द्विजतो भयम् । दवितीय सप्तमस्थे वा देहवाधा भविष्यति ।।65।। दोषस्य परिहारार्थं शिवसाहच्रक जपेत् । गोभूहिरण्यदानेन सर्वारिष्टं व्यपोहति ।।66।। दशेश से 6.8.12 में बलहीन गुरु हो तो शरीर मेँ कष्ट, विकलता (बेहाल या अंगहीन) स्त्री व माद्य से विषमता, राजा का क्रोध, धनहानि अचानक कलह कं अवसर, मय, असावधानी, पक्षी या ब्राहमण से मय होता है । यदि गुरु 2.7 मावेश होकर या अन्य मावेश होकर भमी 27 मेदी स्थित हो तो देहबाधा अर्थात् शरीरकणष्ट होता है । इसकी शान्ति के लिए शिव सहस्रनाम या सहस्ररुद्रीयामिषेक, गाय. भूमि व सुवर्णं (रुपया) का दान करने से सब अनिष्ट शान्त हो जाते है ।
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