Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi
उज्जयिनी से पूर्व और पश्चिम देशान्तर योजन में अपना चतुर्थांश घटाने से देशान्तर पल होता है। वह पूर्व में ऋण, पश्चिम में धन समझना। तथा ३० और दिनमान के अन्तर को आधा करने से चरखण्ड होता है। यह दिनमान ३० से अधिक हो तो धन, अल्प हो तो ऋण समझना। फिर इसके द्वारा षड्वर्गाध्यायोक्त विधि से वारप्रवृत्ति साधन करना ॥ १४ ॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.