Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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सूर्य के भोग्यांशवश दिनमान साधन कर अग्रिमराशियों के उदयमान सहित उन भोग्यपलों को इष्ट घड़ी के पल में घटायें, जो शेष पल बचे उसको ३० से गुनाकर अशुद्ध राशि के उदय का भाग देकर लब्ध अंशादिकों के ऊपर (आदि में) मेषादि राशि जोड़ने से लग्न हो जाता है ॥ १२ ॥
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