Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
लग्न से ११ भाव में मंगल रवि, षष्ठ में शनि, द्वितीय में चन्द्रमा, नवम में शेष ग्रह (बुध, बृहस्पति, शुक्र) हों तो श्रीवत्स नामक योग होता है, विवाह में यह योग रूपहीना स्त्री को भी सौभाग्य और सुख भोग के भार को रचनाओं से उमंग अंगवाली बनाता है ॥ ५॥
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