Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
बुध, गुरु, और शनि ये क्रम से लग्न, नवम और एकादश भावों में हों तो गज नामक योग होता है। इस योग में विवाहिता स्त्री अहंकारयुक्ता होकर अपनी सञ्चित सम्पत्ति को दान करनेवाली अथवा देवता और प्रारब्ध की उपासना करनेवाली होती है ॥ १२ ॥
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