Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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राशिमण्डल के पूर्वार्ध (दशम भाव से आगे चतुर्थभावपर्यन्त) में सब पापग्रह और पश्चिमार्ध (चतुर्थ भाव से आगे दशमभाव पर्यन्त) में सब शुभग्रह हों तो चक्रनाम योग होता है। इस योग में विवाहिता स्त्री की मनोवृत्ति स्वैरिणी विषय में विशेषकर भ्रमित होती है, अर्थात् वह पुंश्चली होती है ॥ १ ॥
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