Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जब तक भगवान् सूर्य सुक्ताफलमाला सदृश तारागणपंक्ति को धारण की हुई पूर्व दिशा को कुंकुम से मण्डित के समान और पश्चिम दिशा को कुसुमरंग से रंगे चरख से सुशोभित के समान बनाते हुए सन्ध्यारूपिणी वधू के साथ करग्रह को प्राप्त होते हैं — तावत् काल पर्यन्त अंकों में लगी है गायों के चरण की धूलि जिसके ऐसे कुमारिका के करग्रहण करने वाले पुरुष का मंगल होता है ॥ १ ॥
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