HomeLibrarySaravaliCh.32Verse 87
Sārāvalī
Chapter 32 · Ninth House And Effects Thereof · भाग्यचिन्ता नाम टात्रिशोऽऽ्यायः ॥ त्रयरित्रशो · Verse 87
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
नवम में सूर्य चन्द्रमा बुघ गुरु युति का फल
शशिसुरगु रुबुधरवयो जन्मनि भाग्यःमाश्रिताः कुयु: ।
पुरुषं प्रधानमचलं नरेन्द्रपूज्यं तथा हृष्टम्‌
Translations
English

If the Sun, Mercury, Moon and Saturn be together in the 9th, one will be rich, splendourous, kingly, will have many quadrupeds and will possess rich qualities.

Hindi

। यदि जन्म के समय लग्न में शुक्रशनि हों तो जातक--समस्त स्त्रियों के साथ रमण करने वाला, सुन्दर देहधारी, सुख-घन-भोग से युक्त, अधिक नोकर बाला व शोक से पीड़ित होता है । यदि चतुर्थ भाव में शुक्र शनि हों तो जातक--मित्ों से घन प्रात्तकर्ता, बन्धुओ से अच्छा व्यवहारी तथा राजा से श्रेष्ठता प्राप्त करने वाला होता है । र यदि सप्तम भाव में शुक्र शनि हों तो जातक- स्त्री रत्न-सुख-धन-कोति समस्त ऐश्वर्य को प्राप्त करने वाला तथा विषय प्राप्तकर्ता होता हे । यदि दशम भाव में शुक्र शनि हों तो जातक--समस्त॑ झंझटों से रहित, संसार में प्रसिद्ध, बिशेष कार्य कर्त्ता तथा राजा का बड़ा सचिव होता है । इस प्रकार मैंने केन्द्रस्थ दो-दो ग्रहों का फल कहा है, तीन, चार, पाँच, छः ग्रहों का केन्द्रस्थ ग्रहयोग फल बुद्धि से विचार कर कहना चाहिये

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse