HomeLibrarySaravaliCh.32Verse 72
Sārāvalī
Chapter 32 · Ninth House And Effects Thereof · भाग्यचिन्ता नाम टात्रिशोऽऽ्यायः ॥ त्रयरित्रशो · Verse 72
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
नवम में चन्द्रमा वुध शुक्र योग का फळ
मातृसपत्नीजनकं प्रमुदितमानान्वितं प्रचुरमित्रम्‌ ।
कुवेन्ति सामशीलं भृगुवृधचन्द्रा नरं भाग्ये
Translations
English

If the Moon, Mercury and Venus be together in the 911, one will have a stepmother, be endowed with delight and honour, will have many friends and will be gentle, or pacific.

Hindi

यदि जन्म के समय लग्न में बुध-शनि हों तो जातक-दूषित देहधारी, पापी, विद्या- धन-सवारी से रहित, अल्पायु व हीन भाग्य वाला होता हैं । यदि चतुर्थ भाव में बुध शनि हों तो जातक--पेय-अन्न-बन्तु से हीन, अपने मनुष्यों में असम्मान प्राप्त कर्ता, मूर्ख, मित्रों से रहित व पापी होता हु यदि सप्तम भाव में बुध शनि हों तो जातक--ईश्वर का सेवक, मूर्खं, परोपकारी, दुर्जन अधिक दूषित तथा असत्यभाषी होता है ! यदि दशम भाव में बुध शनि हों तो जातक--समस्त शत्रुओं को शान्त करने वाला, अपने मनुष्य-मित्र-सवारी-धन से समृद्ध तथा ब्राह्मण-गुरु-देवता की पूँजा करने वाला होता है

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