HomeLibrarySaravaliCh.21Verse 17
Sārāvalī
Chapter 21 · Nabhasa Yogas · (chapter 21) · Verse 17
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
Translations
English

Thus, I have explained the twenty different Akriti Yogas. Now, I explain the Asraya Yogas, as per the schools of thought of senior Garga etc.

Hindi

जा० १२।४। ) ~ " इत्याकृतिजा एते विशतिसंख्या मया समुदिष्टा: । आश्रयजातान्‌ वक्ष्ये यथामतं वृद्धगाग्यंस्य* ||१७॥ यदि कुण्डली में ग्न से एक राशि अन्तर करके सब ग्रह हों तो चक्र योग, अर्थात १।३।५।७।९।११ इन ६ भावों में ही समस्त ग्रह हों तो यह्‌ योग होता है । द्वितीय भाव टा से १२ वें भाव तक एक अन्तर से अर्थात्‌ इन २।४।६।८।१०।१२ सम भावों में समस्त ग्रह हों तो समुद्र योग होता हैं । सारांश--विषम भावों में सब ग्रह होने पर चक्र व सम भावों में समस्त ग्रह होने पर समुद्र योग होता है । इस प्रकार मैने इन २० आकृति योगों का वर्णन किया है, अब वृद्ध गाग्यं के मत से आश्रय योगों का वर्णन करता हैं कुण्डली में आकृति बनने के कारण ही इन २० योगों को आकृति योग कहा हैं

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