HomeLibrarySaravaliCh.40Verse 11
Sārāvalī
Chapter 40 · Moola Dasa · (chapter 40) · Verse 11
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
विद्याशास्त्रज्ञाने मित्रप्राप्ति करोति बुधराशौ |
झौक्रेऽन्तपानमतुलं सौर्यं स्चन्द्रेडरिनाशं च
सुखधनमानाज्ञाप्ति जीवगृहे दिशति शीतांशुः |
परिणतवयसमरूपां सौरगृहे वर्षकी वाऽपि
दुर्गारण्यनिवासं कर्षेणगृहकमंसेतुकर्मान्तम्‌ ।
सिंहे शशी प्रकुरुते स्त्रीपुत्रविवादमरति च
Translations
English

VYAYADI (CHAKRARDHA) HARANA. A malefic in the 12th loses all his contribution. If in the 11th half, in the 10th a third, in the 9h a fourth, in the 8th one fifth and in the 7th one sixth of the contribution suffers. Benefics in these places lose just half of what malefics lose. Further, if there are two, or more planets in one and the same House, only the strongest suffers reduction.

Hindi

यदि पापग्रह बारहवें भाव में हो तो पूरे बर्ष घटाना, एकादश भाव में पापग्रह रहने पर आधा घटाना, दशमभाव में रहने पर तृतीयांश घटाना, नवम भावस्थ होने पर चतुर्थांश घटाना, अष्टम भाव में होने पर पञ्चमांश घटाना और सप्तमभावस्थ पाप- ग्रह होने पर साधित आयु में षष्ठांश घटाना चाहिये । इन्हीं द्वादशादि स्थानों में शुभ” ग्रह के रहने पर पापग्रह का आधा घटाकर ग्रहण करना चाहिये । यथा १२वें भाव में शुभग्रह के रहने पर साबित आयु में आधा घटाना, ११वें रहने पर चतुर्थांश, १०वें भाव में शुभग्रह के रहने पर षष्ठांश घटाना चाहिये । इसी प्रकार आगे भी समझता चाहिये । यदि इन्हीं स्थानों में किसी एक स्थान में अधिक ग्रह हों तो उनमें जो सबसे बली हो उसी एक ग्रह की साधिन आयु में उक्त हानि करके ही ग्रहण करना चाहिए । सब ग्रहों में हानि नहीं करनी चाहिए

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