HomeLibrarySaravaliCh.47Verse 2
Sārāvalī
Chapter 47 · Lost Horoscopy · नष्ट जातकाध्याये लग्नगुणो नाम · Verse 2
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
Translations
English

Death may be due to the imbalance of that humour belonging to the planet aspecting the 8h House. If there is no planet in the 8h House, the aspecting one may indicate the kind of death. If many are thus related, the strongest one will prevail.

Hindi

यदि जन्म के समय में अष्टम भाव में सूर्य हो तो जातक की मृत्यु अग्नि से होती है । यदि अष्टम भाव में चन्द्रमा हो तो जल से, भोम हो तो शस्त्र से, बुध हो तो ज्वर से, गुरु हो तो आँव रोग से, शुक्र डो तो प्यास से, शनि हो तो भूख से जातक की मृत्यु होती है । है : यदि अष्टम भाव में चर राशि द्विस्वभाव राशि हो तो मागं में जातक की मृत्यु होती है । यदि अष्टम भाव में कोई ग्रह न हो तो जो बलवान्‌ ग्रह अष्टम भाव को देखता हो उसी ग्रह के धातु कोप से जातक का मरण होता है, अर्थात्‌ यदि बली सूर्य से अष्टम भाव दृष्ट हो तो पित्त के प्रकोप से, बळी चन्द्रमा से दुष्ट अष्टम भाव हो तो वायु वा कफ के प्रकोप से, बली भौम से दृष्ट हो तो पित्त प्रको' र हर प्‌ से, इसी प्रकार अन्य ग्रहों के धातु प्रकोप अन्य ग्रहों के घातु यथा बुध कफ, पित्त, वर्णित हे । जो राशि अष्टम भाव में हो वह स्थान म हा उसी स्थान में उक्त धातु विकार ग्रहों से दृष्ट अष्टम भाव हो तो अनेक प्रकार है

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