HomeLibrarySaravaliCh.8Verse 18
Sārāvalī
Chapter 8 · Conception · आधानेऽष्टमोऽध्यायः · Verse 18
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
Translations
English

Birth of Hermaphrodite. Birth of a hermaphrodite should be declared, if the Sun and the Moon be in odd Rasis and be in mutual aspect, or, if Mercury and Saturn be in mutual aspect from odd Rasis, or, if Mars aspects the Sun, who is in an even Rasi, or, if the Moon is in Lagna in odd Rasi. These are the views of sages. If Mars aspects Mercury in odd Rasi and simultaneously the Moon in even Rasi, same effect follows. Alternatively if Lagna, Moon and Mercury be in odd Rasi and odd Navansa and aspected by Venus and Saturn, eunuch birth is indicated.

Hindi

प्रश्‍न अथवा आधान समय में यदि बलवान्‌ विपम राशिगत सूर्य और चन्द्रमा परस्पर दुष्ट हों अर्थात्‌ सुर्य चन्द्रमा को देखता हो और चन्द्रमा सूर्य को देखता हो तो गर्भ में नपुंसक का जन्म कहता चाहिये । यह एक योग हे । विषम राशिगत बली शनि और पुरुष बुध परस्पर में दृष्टि सम्बन्ध रखते हों तो द्वितीय योग । यदि विषम राशिगत भौम समराशिगत सूर्य को देखता हो तो तृतीय योग । यदि समराशिगत मंगल, विषम राशिस्थ लग्न और चन्द्रमा को देखता हो तो चतुर्थ योग । यदि विषम राशिस्थ बुध व समराशिस्थ चन्द्रमा को मंगल देखता हो तो पञ्चम योग । अथवा यदि विषम रागि में या विषमरायि के नवां में लग्न, चन्द्रमा, वुध हों और उन पर शुक्र शनि की दृष्टि हो तो भी नपुंसक का जन्म कहना चाहिए । यह छठा योग है ॥ इसका विचार जन्माङ्ग में भी करना चाहिये । बिशेष--यहाँ पर ग्रन्थकार की उक्ति युबितसंगत प्रतीत होती है । क्योंकि बृह ज्जातक में सूर्यं चन्द्रमा को सम-विषम राशिगत कहकर योग का वर्गन किया है किभ्तु पूर्ण दृष्टि वहाँ पर सूर्य चन्द्रमा में सिद्ध नहीं होती है, पाद दृष्टि के बल पर ही योग बन सकता है । पाद दृष्टि से योग में न्यूनता आती है । पूर्ण दृष्टि तो सुर्य चन्द्रमा की सप्तम पर होती है । इसलिये परस्पर में समराशिस्थ अथवा विषम राशिस्थ सूर्य चन्द्रमा सिद्ध होते हैं । विद्वान्‌ लोग इसका विचार करें ॥१८ -२०॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse